नारी सशक्तिकरण में पुरुषों की महत्वपूर्ण भूमिका पर आधारित है पुस्तक
शहर के विशिष्ट गणों की उपस्थिति में हुआ विमोचन
पुस्तक को लोगो की मिली सराहना
दुर्गापुर: शहर के एक निजी होटल के प्रेक्षागृह भी युवा रचनाकार झलक भट्टड़ की पहली पुस्तक अन्निका: ड्यूटी और ड्रीम का विमोचन शनिवार को किया गया.
इस दिन डीसीपी ईस्ट विवेक गुप्ता, अड्डा के चेयर मैन कवि दत्त, डी वी सी के निवर्तमान अध्यक्ष पीके मुखोपाध्याय, विशिष्ट समाजसेवी हनमान दास जी भट्टड ,निवर्तमान अध्यक्ष, अखिल भारतीय माहेश्वरी महिला संगठन शोभा सादानी ने दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की और पुस्तक का विमोचन किया.इस मौके पर कोलकाता से पधारी राम-राम आर्ट की कविता ढाका, समाज सेवी राम प्रसाद हालदार, चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के सचिव विजय गुप्ता, एसबीएफ सी दुर्गापुर के सचिव रोहित मोहनका, डॉ दीपन्निता सेन, प्रधान जिला माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष जगदीश जी बागड़ी, विपुल पाणिग्रही, संतोष महेश्वरी, आर एस कंबो , राजेश महेश्वरी, विकास जैन, महिंद्रा मौर्य, प्रवीर बनर्जी,आलोक गाड़ोदिया,अशोक चांडक सहीत
शहर के विशिष्ट गण उपास्थित रहे. विमोचन के मौके पर झलक भट्टड़ ने अपनी पुस्तक के बारे में बताते हुए कहा कि जीवन के विभिन्न अनुभवों ने मुझे महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके संघषों के बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर किया. इसी सोच को अपनी पुस्तक अन्निका में उकेरा. उन्होंने कहा कि संसार में नारी सशक्तिकरण एक ऐसा विषय है, जो केवल सहिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रासंगिक है। बदलते समय के साथ, महिलाओं ने हर ओर में अपनी काबिलियत साबित की है, लेकिन यह सफल आसान, लाही. रहा है। इस संघर्ष और सफलता की, गाथा को मैंने अपनी इस पुस्तक में पस्तुत किया है। यह पुस्तक उन सभी महिलाओं को समर्पित है, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए हर चुनौतियों का सामना करती हैं, और उन पुरुषों को भी, जो इस मात्रा में उनके साथी बनते हैं।अन्निका एक ऐसी नायिका की कहानी है, जो पारिवारिक जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत आकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है। अन्निका की यात्रा सिर्फ अपने जीवन के उतार-चढ़ाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर उस महिला की कहानी है, जो अपने सपनी के लिए लड़ती है और अपने परिवार के साथ अपने भविष्य को संवारने की कोशिश करती है। इस पुस्तक में अन्निका के संघर्ष, उसकी सोच, और उसकी मजबूत इच्छाशक्ति को बड़े ही भावनात्मक और प्रेरणादायक तरीके से पेश किया गया है।
लेकिनअन्निका की सफलता में एक और महत्वपूर्ण पात्र है उसका पति। आज के समाज में, जब हम नारी सशक्तिकरण की बात करते हैं, तो हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पुरुषों का महयोग और समर्थन महिलाओं के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अन्तिका का पति न केवल उसके सपनों का सम्मान करता है, बल्कि हर मुश्किल घड़ी में उसका हाथ थामे खड़ा रहता है। वह नारी सशक्तिकरण का एक सच्चा उदाहरण है, जो दिखाता है कि पुरुषों का सकारात्मक रवैया महिलाओं के लिए एक मजबूत आधार कैसे बन सकता है।यह पुस्तक न केवल महिलाओं के लिए है, बल्कि उन पुरुषों के लिए भी है. जो अपने घर-परिवार में महिलाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहते हैं। यह कहानी उन माता-पिता, शिक्षकी, और समाज के हर उस व्यक्ति के लिए है, जो आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर समाज देना चाहते हैं, जहा महिला और पुरुष समान रूप से एक-दूसरे के सहयोगी हो।'अन्निकाः कर्तव्य या सपना एक प्रेरणादायक गाथा है. यह कहानी उन युवा लडकियों के लिए है. जो अपने सपनों को लेकर उत्साहित है, और उन महिलाओं के लिए है, जो अपने जीवन के अनुभवों से सीखकर आगे बढ़ना चाहती हैं। साथ ही, यह उन पुरुषों के लिए भी है, जो अपने जीवनसाथी, बहन, या बेटी के सपनों का सम्मान करते हैं और उन्हें पूरा करने में उनका साथ देते हैं। उन्होने आगे कहा कि मैं अपने इस अनुभव और कहानी के माध्यम से यह संदेश देना चाहती हूं कि महिलाओं की सशक्तिकरण के इस सफर में पुरुषों का साथ बहुत महत्वपूर्ण है। अगर हम एक सशक्त समाज का निर्माण करना चाहते हैं, तो हमें एक-दूसरे का साथ देना होगा। 'अन्निकाः ड्यूटी औरड्रीम' समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने और लोगों को एक नई दिशा दिखाने की उम्मीद रखती है।

