सावन माह के चौथे सोमवार पर बाबा विश्वनाथ की नगरी केशरियामय हो गई है। बाबा के स्वर्णमंडित दरबार में पूरे श्रद्धाभाव से पावन ज्योर्तिलिंग पर आस्था की अखंड जलधार गिर रही है। धाम परिसर श्रद्धालुओं के हर-हर महादेव, काशी विश्वनाथ शंभों के गगनभेदी कालजयी उद्घोष से गुंजायमान है।

